सूफी गायिका ज्योति नूरां को मिलेगा ‘विकसित भारत सूफी सिंगर अवॉर्ड’
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि ज्योति नूरां ने अपनी प्रभावशाली आवाज और विशिष्ट गायन शैली के माध्यम से सूफी संगीत को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। उनके गायन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों की झलक दिखाई देती है, जो नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की अवधारणा केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को भी इसमें समान महत्व मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित कर रहा है।
प्रो. जसीम मोहम्मद के अनुसार, सूफी संगीत भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की ऐसी विरासत है, जो सदियों से प्रेम, शांति, सद्भाव और इंसानियत का संदेश देती आई है। ज्योति नूरां ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से इस परंपरा को व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य, कला, संस्कृति और संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में कार्य कर रहा है। आगामी आयोजन में देश के साहित्यकारों, कलाकारों, संगीतकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों की सहभागिता प्रस्तावित है। ‘विकसित भारत सूफी सिंगर अवॉर्ड’ ज्योति नूरां के संगीत योगदान के साथ भारतीय सूफी परंपरा के समकालीन स्वरूप के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। - उज़मा अंसारी
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