“मशीन नहीं, इंसान बनाओ-यही एनईपी 2020 की पहली शर्त”: डॉ. निशंक
नमो अध्ययन केन्द्र के संवाद में समग्र शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और जेन ज़ी को सशक्त बनाने पर जोर;
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर 10 शिक्षकों को ‘विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार 2026’
नई दिल्ली। भारत की विविध भाषाओं, संस्कृतियों और ज्ञान परंपराओं में निहित आपसी भाईचारा और मानवीय मूल्यों की भावना उसकी शिक्षा व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण आधारशिला रही है। इसी सोच को आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ते हुए ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को केवल दक्ष पेशेवर नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनाए। इसी दिशा में नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ (नमो अध्ययन केन्द्र) द्वारा डीएआईसी के सहयोग से आयोजित ‘नमो विकसित भारत संवाद’ के विशेष सत्र में शिक्षा के व्यापक स्वरूप पर चर्चा हुई। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: भारत में समावेशी, अभिनव, भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा और जेन ज़ी को सशक्त बनाना’ विषय पर कहा कि तकनीक और नवाचार जरूरी हैं, लेकिन शिक्षा का केंद्र मानवीय विकास और मूल्य होने चाहिए। उन्होंने कहा, “मशीन मत बनाओ, इंसान बनाओ। यह इस नई शिक्षा नीति की पहली शर्त है।” उन्होंने मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा और भारत की भाषाई विविधता के सम्मान पर जोर देते हुए तमिलनाडु में तमिल और केरल में मलयालम के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा का उदाहरण दिया। साथ ही औपनिवेशिक शिक्षा की विरासत से आगे बढ़कर भारतीय बौद्धिक एवं ज्ञान परंपराओं से जुड़ने की आवश्यकता बताई।
श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी अंका वर्मा ने एनईपी 2020 को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी शिक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने शिक्षा को राष्ट्र की शक्ति का प्रमुख आधार बताते हुए जेन ज़ी की रचनात्मकता और आकांक्षाओं को शिक्षा व्यवस्था में स्थान देने की बात कही। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शिक्षण और राष्ट्र-निर्माण में योगदान के लिए 10 शिक्षकों को ‘विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया।
नमो अध्ययन केन्द्र के सभापति प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि पहल ने एनईपी 2020, भारतीय ज्ञान प्रणालियों और जेन ज़ी युवाओं को एक मंच पर लाया है, जबकि शैक्षिक बदलाव में शिक्षकों की भूमिका केंद्रीय है। तीन सत्रों वाली कार्यशाला में प्रो. लवली शर्मा, प्रो. पायल कंवर चंदेल, प्रो. रमन चड्ढा, डॉ. सैयद महरुल हसन, डॉ. श्रीदेवी कल्याण, प्रो. दिव्या तंवर, डॉ. आमना मिर्जा, डॉ. जावेद रहमानी और डीएआईसी के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल सहित शिक्षाविदों ने विचार रखे। सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के इंटर्न ने भी तकनीक, कौशल, नवाचार और शिक्षा के भविष्य पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में तुषिता भंडारी, सविता, आसना, नदीम वारिस खान, एडवोकेट एम.एन. खान, खुशी मखीजा और डॉ. दौलत राम का प्रमुख सहयोग रहा।
- शबाना अज़ीम
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