मौलाना महमूद असद मदनी दूसरी बार जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष चुने गए
कार्यकारी समिति की बैठक में वक्फ एक्ट 2025 और फिलिस्तीन मुद्दे पर हुए महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025।
जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की एक अहम बैठक नई दिल्ली स्थित मदनी हॉल में हुई, जिसकी अध्यक्षता मौलाना महमूद असद मदनी ने की। बैठक में सर्वसम्मति से मौलाना मदनी को 2024–27 के लिए दोबारा केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया।
बैठक में वक्फ एक्ट 2025, फिलिस्तीन शांति समझौता, अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय आरोप, तथा देश में मुस्लिम अल्पसंख्यकों से जुड़े मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यकारी समिति ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा मुसलमानों पर “घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव” जैसे बयानों को निराधार और सांप्रदायिक बताते हुए कहा कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक समानता के लिए हानिकारक हैं। समिति ने सरकार से अपील की कि वह अपुष्ट बयानों से बचे और तथ्यों के आधार पर पारदर्शिता बरते।
वक्फ एक्ट 2025 को जमीअत ने अवकाफ की धार्मिक पहचान के लिए गंभीर खतरा बताया और कहा कि संगठन इसका कानूनी और लोकतांत्रिक स्तर पर पुरजोर विरोध जारी रखेगा। साथ ही “उम्मीद पोर्टल” पर पंजीकरण की अंतिम तिथि दो वर्ष बढ़ाने की मांग की गई।
फिलिस्तीन मुद्दे पर जमीअत ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति तभी संभव है जब 1967 की सीमाओं के अनुसार एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना हो। संगठन ने इज़राइल द्वारा किए जा रहे फिलिस्तीनियों पर हमलों और गाजा की घेराबंदी की कड़ी निंदा की और संयुक्त राष्ट्र व ओआईसी से निर्णायक हस्तक्षेप की अपील की।
बैठक में देशभर से जमीअत के वरिष्ठ सदस्य और उलमा शामिल हुए, जिनमें मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मौलाना सलमान बिजनौरी, मुफ़्ती अहमद देवला, मौलाना रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी सहित अनेक प्रदेशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक के अंत में कई दिवंगत उलमा और इस्लामी नेताओं के निधन पर दुआ-ए-मग़फ़िरत की गई और नवंबर के अंत में केंद्रीय प्रबंधन समिति की अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
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