मदरसा मज़ाहिर उलूम सहारनपुर में शूरा की बैठक में मुफ़्ती मोहम्मद बदरान सईदी बने नाज़िमे आला व मुतवल्ली
जैनब अंसारी
उत्तर प्रदेश। मदरसा मज़ाहिर उलूम (वक़्फ़) सहारनपुर के मेहमानख़ाने में एक अहम और ऐतिहासिक शूरा बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से आए उलेमा, मशायख़ और मदरसे के वरिष्ठ ज़िम्मेदारान ने बड़ी तादाद में शिरकत की।
बैठक की शुरुआत कुरआन मजीद की तिलावत से हुई, जिसके बाद मदरसे के नायब नाज़िम मुफ़्ती मोहम्मद बदरान सईदी साहब ने अब तक की तालीमी व इदारी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में मदरसे की तालीमी तरक़्क़ी, छात्रों की बढ़ती संख्या, विभागों की सरगर्मियाँ और भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुफ़्ती साहब ने बताया कि हज़रत मौलाना मोहम्मद सईदी रहमतुल्लाह अलैह के इंतेक़ाल के बाद से उन्होंने नायब नाज़िम की हैसियत से संस्थान की तमाम ज़िम्मेदारियाँ बख़ूबी निभाईं और इस दौरान तालीमी व्यवस्था को और मज़बूत बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए।
रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद शूरा के सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मुफ़्ती मोहम्मद बदरान सईदी को बाकायदा नाज़िमे आला और मुतवल्ली नियुक्त किया जाए।
शूरा के तमाम सदस्यों ने मुफ़्ती बदरान सईदी की इल्मी, इदारी और तालीमी सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने उसूल, सादगी और दीनदारी से हमेशा मज़ाहिरी परंपरा को जिंदा रखा है।
उलेमा ने यह भी उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में मदरसा मज़ाहिर उलूम (वक़्फ़) फिर से अपने पुराने शबाब और वैभव को हासिल करेगा और तालीमी दुनिया में अपनी पहचान को और मज़बूत करेगा।
इसी दौरान शूरा ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मौलाना मोहम्मद इस्लामुल हक़ असअदी को शैख़ुल हदीस के पद पर नियुक्त किया। मौलाना इस्लामुल हक़ साहब, हज़रत अल्लामा उस्मान ग़नी रहमतुल्लाह अलैह के बाद से लगातार बुख़ारी शरीफ़ का दरस दे रहे हैं। तालीम के क्षेत्र में उनका गहरा अनुभव और विद्यार्थियों में उनकी मक़बूलियत को देखते हुए यह पद उन्हें सर्वसम्मति से दिया गया।
बैठक के दौरान मदरसे के तमाम विभागों की रिपोर्टें पेश की गईं और विभिन्न योजनाओं पर भी चर्चा हुई। शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने, विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि और नई तालीमी परियोजनाओं को शुरू करने पर विचार-विमर्श किया गया।
शूरा ने कई सुधारात्मक प्रस्तावों को मंज़ूरी देते हुए मदरसे के इदारी ढांचे को और मज़बूत करने पर बल दिया।
इस बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सम्मानित उलेमा व मशायख़ शामिल हुए। जिनमें जामिया गुलज़ार हुसैनिया अजराड़ा से मौलाना हकीम मोहम्मद अब्दुल्लाह मुगीसी, ख़ानकाह रायपुर से शाह अतीक अहमद, ख़ानकाह बूडिया से हाफ़िज़ हुसैन अहमद, और जामिया रशीदुल उलूम चतरा के महत्मिम मौलाना मुफ़्ती नज़र तौहीद मज़ाहिरी शामिल थे।
कुछ अन्य सदस्य उचित कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने दूर से अपनी दुआएँ और शुभकामनाएँ भेजीं।
बैठक का समापन मौलाना हकीम मोहम्मद अब्दुल्लाह मुगीसी की पुरअसर और रूहानी दुआ पर हुआ, जिसमें मदरसे की तरक़्क़ी, उम्मत की इस्लाही कोशिशों और मुल्क में अम्न-ओ-शांति की दुआएँ मांगी गईं।
इस मौके पर जामिया रहमत घगरोली के नाज़िम मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी, क़ारी मोहम्मद मुस्तफ़ा दादरी, हैदर रऊफ़ सिद्दीकी, हाजी तौसीफ़ सिद्दीकी, अब्दुर्रहमान सिद्दीकी, मौलाना अहमद यूशा सईदी, मौलाना अब्दुल माजिद मज़ाहिरी देहलवी, मौलाना अब्दुल जब्बार मज़ाहिरी केरानवी, मौलाना शाहनवाज़ हुसैन समेत कई अन्य सम्मानित हस्तियाँ मौजूद रहीं।
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