डॉ. मंज़ूर आलम की शख्सियत एक आंदोलन है : मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
नई दिल्ली। इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज़ और जेन्युइन पब्लिकेशन्स एंड मीडिया प्रा. लि. द्वारा राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में मशहूर पत्रकार ए.यू. आसिफ की किताब “Dr Mohammad Manzoor Alam: Empowering the Marginalised” का शानदार लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस किताब में इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज़ के संस्थापक डॉ. मोहम्मद मंज़ूर आलम की ज़िंदगी, संघर्ष, दूरदर्शी सोच और उनकी सामाजिक सेवाओं को विस्तार से दर्शाया गया है। किताब का विमोचन पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री और IICC के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद के हाथों हुआ।
इस अवसर पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, डॉ. उमर हसन कसूले (सेक्रेटरी जनरल, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इस्लामिक थॉट, अमेरिका), प्रोफेसर फ़ैज़ान मुस्तफ़ा (वाइस चांसलर, चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी), डॉ. एस.वाई. कुरैशी (भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त), डॉ. अब्दुल्ला मुतऊक अल मुतऊक( चेयरमैन, IICO, कुवैत), योगगुरु श्री श्री रवि शंकर, एम. अफ़ज़ल (पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ पत्रकार), प्रोफेसर अख्तरुल वासे (शिक्षाविद एवं विचारक), प्रोफेसर मोहम्मद अफ़ज़ल वानी (चेयरमैन, इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज़) आदि सहित देश–विदेश के अनेक बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, धार्मिक नेता और समाजसेवी शामिल हुए जिन्होंने डॉ. आलम की शख्सियत और योगदान पर अपने विचार रखे।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में कहा कि “डॉ. मंज़ूर आलम से मेरी दोस्ती चालीस साल से अधिक पुरानी है। मैंने उनमें एक सच्चे मित्र और दूरदर्शी नेता को पाया। उनकी शख्सियत एक आंदोलन है जो हमेशा ज़िंदा रहेगी, और उन पर लिखी गई यह किताब आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक होगी।” उन्होंने कहा कि डॉ. आलम की सोच और काम ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के वंचित तबके को नई दिशा दी है।
समारोह में अमेरिका से इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इस्लामिक थॉट के सेक्रेटरी जनरल डॉ. उमर हसन कसूले ने कहा कि “ज्ञान को परिवर्तन का साधन बनाना डॉ. आलम का महान कार्य है। उन्होंने सऊदी अरब में उच्च पद पर रहते हुए भी अपने देश लौटकर एक ऐसा शोध संस्थान स्थापित किया जिसने पूरी दुनिया में बौद्धिक और सामाजिक दिशा दी।” पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि “डॉ. मंज़ूर आलम की शख्सियत हमारे लिए रोशनी का मीनार है। इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज़ उनका ऐसा कारनामा है जिसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं।”
चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर फ़ैज़ान मुस्तफ़ा ने कहा कि “यह हैरानी की बात है कि डॉ. साहब ने इतने अलग-अलग विचारों वाले बुद्धिजीवियों को एक मंच पर जोड़ा। IOS ने ज्ञान-सृजन का जो कार्य किया है, वह अपने आप में मिसाल है।” भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. एस.वाई. कुरैशी ने कहा कि “भारत में गुणवत्तापूर्ण शोध की बड़ी कमी रही है, और डॉ. साहब इस दिशा में प्रेरक रहे हैं। IOS के प्रकाशन हमारे मुद्दों को ठोस तर्कों के साथ सामने लाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।”
कुवैत से IICO के चेयरमैन डॉ. अब्दुल्ला मुतऊक अल मुतऊक ने कहा कि “डॉ. मंज़ूर आलम ज्ञान और चेतना की आवाज़ का नाम हैं।” योगगुरु श्री रवि शंकर ने कहा कि “डॉ. आलम ने हमेशा समाज में बंटवारे और दूरी को मिटाने की कोशिश की। उनकी जीवनी हमारे लिए मार्गदर्शक है और आज की स्थिति में हम और बिखराव बर्दाश्त नहीं कर सकते।” पूर्व सांसद एम. अफ़ज़ल ने कहा कि “डॉ. मंज़ूर आलम एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था हैं, जिनकी उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार होना चाहिए।” वहीं प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि “डॉ. मंज़ूर आलम ने ‘थिंक टैंक’ की संकल्पना को व्यवहार में उतारा।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज़ के चेयरमैन प्रोफेसर मोहम्मद अफ़ज़ल वानी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि “IOS एक आंदोलन है — सच्चाई को सच्चाई की तरह देखने और दिखाने का आंदोलन। IOS, ‘फिक्ह अकादमी ऑफ इंडिया’ और ‘ऑल इंडिया मिली काउंसिल’ जैसी संस्थाएँ डॉ. आलम की सोच और दृष्टि की उपज हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. निखत हुसैन नदवी की तिलावत से हुई और स्वागत भाषण डॉ. ज़ेड.एम. खान ने दिया। अंत में प्रोफेसर हसीना हाशिया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह समारोह डॉ. मंज़ूर आलम की जीवंत सोच, बौद्धिक विरासत और समाज के वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के प्रति उनके समर्पण को समर्पित रहा।
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