दिल्ली में हुआ सैयदा अदीना शाह द्वारा लिखित पुस्तक “व्हिसपर्स ऑफ़ द सोल्स” का विमोचन




 नई दिल्ली। भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और समृद्ध साहित्यिक परंपरा हमेशा से नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करती रही है, जहाँ अनुभवी रचनाकारों के साथ-साथ युवा लेखक भी अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का प्रयास करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजधानी दिल्ली में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान युवा लेखिका सैयदा अदीना शाह की पहली पुस्तक “व्हिसपर्स ऑफ़ द सोल्स” का विमोचन किया गया।


ओखला स्थित तस्मिया ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सैयद फारूक ने की, जबकि पद्मश्री प्रोफेसर अख़्तरुल वासे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह पुस्तक मशहूर शायर डॉ. एजाज़ुद्दीन शाह ‘पॉपुलर मेरठी’ की पुत्री सैयदा अदीना शाह की पहली साहित्यिक कृति है, जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों और शिक्षाविदों ने सराहा।


कार्यक्रम में शिक्षा और साहित्य जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. खालिद महमूद, डॉ. तस्नीम (पूर्व चेयरपर्सन, जामिया मिलिया इस्लामिया), डॉ. ख्वाजा शाहिद, प्रो. खुर्शीद अंसारी (जामिया हमदर्द) और डॉ. सज्जाद शामिल रहे। इसके अलावा इरफान आज़मी, परवीन शगफ, शायदा अनवर, मुनीर हमदम, डॉ. फरमान सरधनवी, राशिद रहमान, नीतीश कुमार, मोहम्मद अखलाक, अमजद लोधी, डॉ. मुश्ताक अंसारी, डॉ. कमरूल हक, शबाना अज़ीम, सरवत उस्मानी, इरम शाह और आसिफ अहमद सहित कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण सैयदा अदीना शाह का प्रभावशाली अंग्रेज़ी भाषण रहा, जिसमें उन्होंने अपनी


पुस्तक की पृष्ठभूमि, विचार और विषय-वस्तु को आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ प्रस्तुत किया। उनकी अभिव्यक्ति में भावनात्मक गहराई और बौद्धिक स्पष्टता ने श्रोताओं को प्रभावित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. अख़्तरुल वासे ने अपने वक्तव्य में कहा कि तस्मिया ऑडिटोरियम और जामिया नगर जैसे शैक्षिक वातावरण में इस पुस्तक का विमोचन होना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अदीना शाह ने यहीं से अपनी शिक्षा, विशेषकर मनोविज्ञान की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक और कुरआनी विचारों की झलक भी देखने को मिलती है। उन्होंने अदीना शाह को कम उम्र में इस तरह की सार्थक रचना के लिए बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में उनकी और भी रचनाएँ सामने आएंगी। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि इस पुस्तक का हिंदी और उर्दू में भी अनुवाद किया जाना चाहिए, ताकि यह अधिक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच सके।


अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सैयद फारूक ने सैयदा अदीना शाह की सराहना करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर लड़कियाँ, हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार डॉ. पॉपुलर मेरठी अपनी शायरी के जरिए देश-विदेश में पहचान बना चुके हैं, उसी तरह सैयदा अदीना शाह भी अपनी इस पुस्तक के माध्यम से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करने में सफल हुई हैं।


इस अवसर पर डॉ. पॉपुलर मेरठी ने भावुक होते हुए कहा कि एक पिता के रूप में यह उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है कि उनकी बेटी ने लेखन के माध्यम से अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।


“व्हिसपर्स ऑफ़ द सोल्स” भावनाओं, अनुभवों और रूहानी विचारों का एक ऐसा संग्रह है, जो पाठकों के दिल को छूने की क्षमता रखता है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि साहित्य न केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, समझ और आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करता है।

ज़ैनब अंसारी

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